आज अपनों में हम बेगानें नज़र आते हैं

आज अपनों मे हम बेगने नज़र आते हैं ।
खुद को जब देखते दीवाने नज़र आते हैं।।

जब तक था साथ आपका हुई रोशन दुनिया।
आज हम फिर से अंधेरों में घिरे जाते हैं।।

बनके हमराज मेरा दर्द बँटाया पहले ।
अब तो वो भी तो हमसे राज छुपा जाते हैं।

हमने बस जिन्दगी में ख़्वाब उन्हीं के देखे।
अब न जाने क्यूं वो मिलने से भी कतराते हैं ।।

गर सनम हमसे भर गया हो दिल, बता देना।
जफ़ा से कम ही ज़ुदाई के गम के सताते हैं।।

कभी अनिल के दर्द-ए-दिल की ख्वाइशें समझो।
तन्हाईयों में भी तेरी यादों का गुल खिलाते हैं।।

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