इज्जत वाले ही लोंगो से कहते है कपडे पहनो

ना झगड़ा ना गुस्सा होंगे ये कोशिश बेकार है।
रोज लड़ेंगे रोज मिलेंगे ऐसा अपना प्यार है॥

मेरी मंशा कभी नही थी नीचा तुम्हे दिखने की।
तेरी जीत मे जीत है मेरी तेरी हार मे हार है॥

मेरी मुफलिसी पता थी शायद तभी तो कुछ दिन दूर रहे।
आज बहरों के मौसम मे मिल गये सारे यार हैं।।

त्याग तपस्या की परिभाषा रिश्तों मे अब बदल रही।
अब तो सबको ऐसा लगता प्यार एक अधिकार है।।

इज्जत वाले ही लोंगो से कहते है कपडे पहनो।
बहशी लोंगो को नंगा ही अच्छा ये संसार है॥

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