कल फिर सुबह होगी

बस आज वो नाकाम है कल फिर सुबह होगी।

दो चार पल आराम है कल फिर सुबह होगी।।

कह दो उसे उम्मीद की शम्मां जला रक्खे।
गर्दिश नहीं ये शाम है कल फिर सुबह होगी।।

मेरे आवारापन ने मुझे ये बात दिया।
महफिल बड़ी बदनाम है कल फिर सुबह होगी।।

दो घूँट कड़वे भी कभी पीकर के चुप रहो।
यह बेखुदी का जाम है कल फिर सुबह होगी।।

हिम्मत से जीती जाती है हारी हूई बाजी।
यह जिन्दगी संग्राम है कल फिर सुबह होगी।।

एक वक्त ही तो है जो गुजरता ज़रूर है।
यह बात बहुत आम है कल फिर सुबह होगी।।

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