देखो भक्तों के संग भोलेबाबा!
आज कांवर उठाये हुये हैं।
कौन पहचाने उनको सब अपनी
अपनी धुन मे रमाये हुये हैं।।
देखो भक्तों के संग भोलेबाबा…..
आज है ना वो तन पे दुशाला
नागमाला नहीं है गले में।
भक्तो के बीच में देखो भगवन
भगवा-चुनरी में आये हुये हैं।।
देखो भक्तों के संग भोलेबाबा…..
देवता खुश हो यह रूप निरखें
गौरी मईया भी मुसका रही है।
जो नचाते हैं सृष्टी को देखो
नाचने आज आये हुये हैं।।
देखो भक्तों के संग भोलेबाबा…..
कितना पावन है सावन महीना
भक्तों की मुक्ति का द्वार खोले।
छोड़कर जिसमें कैलाश पर्वत
भोले धरती पे आये हुये हैं।।
देखो भक्तों के संग भोलेबाबा…..
अनिल मिश्र – 09/07/2003.