घटाएँ झूमकर आयी और बरसात हो गयी।
हवाएँ रागिनी गायी और बरसात हो गयी।।
मेरे मन के मधुबन मे वो जब मुस्काई मधुबाला।
याद मधुमास की आयी और बरसात हो गयी।।
रिमझिम की जल मे मन मयूर भीगने चला।
एक हसीं याद फिर आयी और बरसात हो गयी।।
बहरों के बीच आफताब बन के छा गयी।
‘अनिल’ की एक गज़ल आयी और बरसात हो गयी।।
Written by Anil Mishra in 1998.