गजानन स्तुति

मेरी वन्दना गजानन स्वीकार कीजिये ।
आकर के आज अवनी पर अवतार लीजिये।।
एक बार तो धरा पर उपकार कीजिये ।
आकर के आज अवनी पर अवतार लीजिये।।

निर्भय निडर हो पातक यहाँ नृत्य कर रहा है।
तेरा भक्त भक्ति याचक भय से गुजर रहा है।। 
गणपति गणों का अपने उद्धार कीजिये।
आकर के आज अवनी पर अवतार लीजिये।।

ना मातृ-पितृ सेवा सत्कर्म रह गया है। 
बस स्वार्थपूर्ति धरती पर धर्म रह गया है।।
अन्धेर के दनुज का संघार कीजिये।
आकर के आज अवनी पर अवतार लीजिये।।

धरती के फिर से आँचल में स्नेह का कुसुम दो।
सूने अनिल के नयनों में भक्तिभाव तुम दो।।

हे! गौरीनंदन शम्भुसुत कल्याण कीजिये।
आकर के आज अवनी  पर अवतार लीजिये।।

हे! प्रथमपूज्य देवा तेरे सुयश बड़े हैं। 
तेरी भक्ति के सहारे हम जुर्म से लड़े हैं।।
जीवन मरण के सागर से पार कीजिये।
आकर के आज अवनी पर अवतार लीजिये।।

Leave a Reply