हे प्रभू गम देने वाले जान मेरी लीजिये।
इतनी सी विनती प्रभू है मान मेरी लीजिये।।
खुद को क़ुर्बां कर दिया हमने तुम्हारी चाह में।
हो चुका है अब अन्धेरा जिंदगी की राह में।।
हम घिरे मँझधार में साहिल नज़र आता नहीं।
काफिर ने वो धोखा दिया क़ाफ़िल नज़र आता नहीं।।
हर खुशी मेरी प्रभूजी ख्व़ाब बनकर रह गयी।
जिंदगी की हर तमन्ना आँसुओं मे बह गयी।।
जिंदगी की राह में हर मोड पर अज़ाब है।
मैं गज़ल हूँ मेरा जीवन एक खुली किताब है।।
चार दिन का मिल गया था चैन जो उधार का।
क्या पता था हमको तेरी दुनिया के ब्यवहार का।।
हर सुहाने मोड़ पर हमको महज गम ही मिले।
गैर तो मिलते गये अपने मगर कम ही मिले।।
एक कुसुम ही मांगा था काँटे भी रास आये नहीं।
अजनबी की याद में अपने भी मन भाये नहीं।।
कैसे यकीं करता नहीं हर शख्स ही भोले मिले।
जब कभी शबनम को चाहा हमको बस शोले मिले।।
बेवफा किसको कहूँ मैं ये मेरा ही दोष था।
सब ने अपनी कह सुनायी और मैं खामोश था।।
दिल को तुम्हारे नाम का विश्वास ना खोने दिया।
सॉंस भी कम हो गयी ना आस कम होने दिया।।
जान लेलो पर प्रभू ना शान मेरी लीजिये।
इतनी सी विनती अनिल है मान मेरी लीजिये।।
Written by Anil Mishra in the year of 2000.