तू गयी पर ये तेरी याद ना जाती क्यों है

आज भी याद तेरी दिल को रूलाती क्यों है ।
तू गयी पर ये तेरी याद ना जाती क्यों है।।

तन्हॉं बरसों से भटकते हैं इस जहान में हम ।
जैसे कोई आस हमें फिर भी सताती क्यों है ।।

यूं तो हम खुद से ही छुपते-छुपाते फिरते हैं ।
चाँदनी फिर भी मुझसे इतना लजाती क्यों है ।।

तुम हो गुलशन के कुसुम हम दरख्त पतझड़ के ।
ये फिज़ाओं मे इतनी बेरुखी आती क्यों है ।।

मैं भी उल्फ़त के मैकदे का प्यासा मैकश हूँ ।
साकी फ़िर मुझसे ही यूँ आँख चुराती क्यों है ।।

अब ना उम्मीद और ना ख्व़ाब कोई ज़िंदा हैं ।
ज़िन्दगी अनिल ऐसे मोड़ पे लाती क्यो है ।।

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