याद कब करते भला छोड़के जाने वाले

बारिशों में भी मेरे दिल को जलाने वाले।
जान लो हम नहीं हैं तुमको भुलाने वाले।।

छूट जो जाते हैं तड़पाते सारे मन्ज़र उन्हे।
याद कब करते भला छोड़के जाने वाले।।

सांस जब तक चले जलेगी ही उम्मीद-ए-शमां।
वो हम नही थे चिरगों को बुझाने वाले।।

रास कैसे उन्हें आता ये प्यार का गुलशन
हर अदाओं से नये गुल को खिलाने वाले।।

संभलते हम रहे गिरकर चमन के ख्वारों मे।
इस अनिल को तो हैं कुसुम ही सताने वाले।।

बस जहां भी रहो आबाद रहो दिलवर तुम।
हम नहीं रूठे मुकद्दर को मनाने वाले।।

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