माना तुम मुझे याद करोगे
आखिर कितने दिन।
दर्द से दिल आबाद करोगे
आखिर कितने दिन ।।
हम हैं भवर मे तुम हो किनारे
ख्वाबों की कश्ती ना पार उतारे
उम्मीदों की बुझती शमां है
गुमशुम-गुमशुम सारा जहां है
ऐसे में फरियाद करोगे
आख़िर कितने दिन
माना हमने कभी प्यार में
सँग चलने के वादे किये
लेकिन हमने जफ़ा नही की
लाख सितम दुनिया के सहे
गम से मुझे आजाद करोगे
आख़िर कितने दिन
गर ये ज़माना दो यारों को
साथ निभाने देता
हुस्न कभी फरियाद ना करता
इश्क ना छुपकर रोता
जख्मों को ऐसे साद करोगे
आख़िर कितने दिन
आज ज़माना बदल गया है
अपना फ़साना बदल गया है
वक़्त ने ऐसी करवट बदली
अनिल दीवाना बदल गया है
फिर भी मुझे बर्बाद करोगे
आख़िर कितने दिन
माना तुम मुझे याद करोगे
आखिर कितने दिन।