दिल्लगी का असर होता है बाद में

भूल से भी सथिया करना कभी ना दिल्लगी।
दिल्लगी का असर होता है बाद में।।

कब दिल्लगी दिल की लगी बनकर के बस गयी।
दिल मे एक छोटा सा घर होता है बाद में।।

खोये-खोये रहने का एक सिलसिला सा हो गया।
प्रेम में तो ये भी डर होता है बाद में।।

इश्क़ कब छिपता “अनिल” हर कोशिशों के बाद भी।
सच्चा प्यार अमर ही होता है बाद में।।

Written by Anil Mishra in 1998.

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